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उपभोक्ता कल्याण कोष

विषय सूची :-

पृष्ठभूमि

उपभोक्ता कल्याण कोष नियम और दिशानिर्देश

उपभोक्ता कल्याण कोष संबंधी स्थायी समिति

उपभोक्ता कल्याण कोष से वित्त पोषित स्कीमें और परियोजनाएं

राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष और मॉडल दिशानिर्देश

जिला उपभोक्ता सूचना केंद्र, जागृति शिविर योजना और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रमों के संबंध में मूल्यांकन रिपोर्ट

विभिन्न स्कीमों के तहत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों और स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों को दिए गए अनुदानों के ब्यौरे

सूचना का अधिकार

संपर्क

1. पृष्ठभूमि

केन्द्र सरकार द्वारा १९९१ में, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क तथा नमक अधिनियम, १९४४ (१९४४ का 1) में उपभोक्ता कल्याण कोष सृजित करने के लिए संशोधन किया गया था जिसमें वह राशि जो निर्माताओं इत्यादि को वापिस नहीं की जानी हो, जमा की जाएगी । कोष में जमा कराई गई धनराशि का उपयोग केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए किया जाएगा ।

उपभोक्ता कल्याण कोष नियमावली २५ नवम्बर, १९९२ को अधिसूचित की गई थी । बाद में, केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद की सिफारशों पर २७ जनवरी, १९९४ को नियमों को और अधिक व्यापक आधार वाला बनाने के लिए, उनमें और संशोधन किया गया । नियमों में १६..९४,१६..९५ और १२..२००२ को आगे और संशोधन किए गए हैं

यह कोष राजस्व विभाग द्वारा स्थापित किया गया है । तथापि, इसका प्रचालन उपभोक्ता मामले विभाग ; उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा किया जाएगा

उपभोक्ता कल्याण कोष का समग्र उद्देश्य उपभोक्ताओं के कल्याण को प्रोत्साहन तथा संरक्षण देने तथा देश में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, स्वैच्छिक उपभोक्ता आन्दोलन को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता देना है

. उपभोक्ता कल्याण कोष नियम और दिशानिर्देश

. उपभोक्ता कल्याण कोष संबंधी स्थायी समिति

समित्िा का गठन :

सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग

 

अध्यक्ष

सचिव, व्यय विभाग अथवा वित्तीय सलाहकार, उपभोक्ता मामले विभाग

 

उपाध्यक्ष

केंद्रीय सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क बोर्ड के सदस्य अथवा राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के कोई अधिकारी

 

सदस्य

सचिव/संयुक्त सचिव/आर्थिक सलाहकार, ग्रामीण विकास विभाग

 

सदस्य

महानिदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो

 

सदस्य

राज्य सरकार के प्रतिनिधि

 

विशेष आमंत्रित

उपभोक्ता मामले विग में उपभोक्ता कल्याण कोष के प्रभारी अपर सचिव/संयुक्त सचिव

 

सदस्य सचिव

. उपभोक्ता कल्याण कोष से वित्त पोषित स्कीमें और परियोजनाएं

उपभोक्ता क्लब

यह स्कीम २००२ में शुरू की गई थी । इसके अनुसार किसी सरकारी मान्यताप्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय से सम्बद्घ प्रत्येक मिडिल/हाई/हायरसेकेण्ड्री स्कूल/कालेज में एक उपभोक्ता क्लब स्थापित किया जाएगा । इस स्कीम को १..२००४ से विकेन्द्रीत करके राज्य सरकारों को अंतरित कर दिया गया है । सभी इच्छुक गैर सरकारी संगठन/स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामले विभाग के नॉडल अधिकारी को आर्डर करेंगे ।

अनुसंधान संगठनों, विश्वविद्यालयों और कालेजों की भागीदारी को बढ़ावा देने की स्कीम

यह स्कीम उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्र में अनुसंधान और मूल्यांकन अध्ययन प्रायोजित करने की दृष्टि से शुरू की गई है ताकि उपभोक्ताओं को पेश आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जा सके । उपभोक्ताओं से संबंधित विषयों पर सेमिनार/कार्यशालाएं/सम्मेलन प्रायोजित किए जा सकें और उपभोक्ताओं के संरक्षण और कल्याण के लिए नीति/कार्यक्रम/स्कीम प्रतिपादित करने के लिए आवश्यक इनपुट प्राप्त किया जा सके । इस स्कीम को शासित करने के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली को नोडल संगठन अभिनिर्धारित किया गया है जिसका पता इस प्रकार है -

प्रोफेसर एस.एस. सिंह,

परामर्शदाता,

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान,

आई पी एस्टेट, रिंग रोड,

नई दिल्ली-११०००२

दूरभाष : २३७०२४००

नेशनल कंज्यूमर हैल्प लाईन

दिल्ली विश्वविद्यालय, वाणिज्य विभाग के सहयोग से एक नेशनल कंज्यूमर हैल्प लाईन परियोजना स्थापित की गई है । उपभोक्ता भारत में कहीं से भी एम टी एन एल, वी एस एन एल की लाइनों से १६००-११-४०० निःशुल्क कॉल करके उपभोक्ता के रूप में अपनी समस्या के बारे में सलाह ले सकते हैं । यह हैल्प लाईन १५..२००५ को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के अवसर पर औपचारिक रूप से शुरू की गई और यह सभी कार्य दिवसों को प्रातः ९.३० बजे से अपराह्न .३० बजे तक कार्य करता है ।

इस हैल्प लाईन का एक सुविधा केंद्र कृषि भवन के गेट नं. ६ के स्वागत कक्ष में भी प्रातः ९.३० बजे से अपराह्न ५.३० बजे तक कार्य कर रहा है ।

ऑन लाइन शिकायत और सहायता के लिए उपभोक्ता ऑन संसाधन और अधिकारिता केंद्र (कोर)

कोर केंद्र की संकल्पना उपभोक्ताओं से संबंधित सूचना और शिकायतों के संग्रहण, प्रसार और प्रतितोष की एक सर्वाधिक वैज्ञानिक और प्रभावकारी प्रणाली के रूप में कार्य करने के लिए की गई है । इसको १५ मार्च,२००५ को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के अवसर पर शुरू किया गया था ।

कोर केंद्र में निम्नलिखित शामिल हैं :-

() राष्ट्रीय संसाधन केंद्र

() ऑन लाइन डाटा बेस/पोर्टल

() उपभोक्ता संगठनों, उपभोक्ता सूचना केंद्रों, सरकार और गैर सरकारी संगठनों के बीच नेटवर्क

() ऑन लाइन शिकायत, पंजीकरण और मेडीएशन तंत्र

उपभोक्ता अब वेबसाइट www.core.nic.in के जरिए कोर में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं । इस वेबसाइट के जरिए वे उपभोक्ता मुद्दों के बारे में सूचना भी प्राप्त कर सकते हैं ।

उत्पादों के तुलनात्मक परीक्षण पर परियोजना

www.consumer.voice.org

. राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष और मॉडल दिशा-निर्देश

विभाग ने उपभोक्ता जागरूकता और उपभोक्ता क्लब स्कीमों को 1 अप्रैल,२००४ से विकेन्द्रित करने और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों को अंतरित करने का निर्णय लिया है। इसके परिणामस्वरूप यह निर्णय केंद्र (उपभोक्ता मामले विभाग) और राज्य सरकार के बीच ५० : ५० (केंद्र : राज्य) के अनुपात में जिलों की संख्या के हिसाब से राशि का एकबारगी अंशदान करके राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को अपने उपभोक्ता कल्याण कोष स्थापित करने की सुविधा प्रदान करने के लिए लिया गया था । पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, जम्मू कश्मीर, उत्तरांचल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप जैसे विशेष श्रेणी के राज्यों के मामले में यह अनुपात ९० : १० (केंद्र : राज्य) है ।

राज्य सरकारों को अलग लेखा शीर्ष में कोष के लिए पहले अपना अंशदान देना होगा और फिर केंद्र के हिस्से की मंजूरी के लिए विभाग को आवेदन करना पडेगा । राज्य उपभोक्ता कल्याण कोषों की स्थापना केंद्रीय उपभोक्ता कल्याण कोष की तर्ज पर की जाएगी और वह संचित निधि से बाहर गैर हस्तांतरणीय, गैर व्यपगमनीय और गैर योजना कोष होगा और इसका प्रशासन विभाग द्वारा प्रारूपित/अनुमोदित एकसमान दिशानिर्देशों द्वारा किया जाएगा ।

. जिला उपभोक्ता सूचना केंद्र, जागृति शिविर योजना और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रमों के संबंध में मूल्यांकन रिपोर्ट

विभाग ने स्कीमों को कारगर बनाने, उनकी उपयोगिता का अध्ययन करने तथा आशोधन करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा उपभोक्ता जागरूकता, जागृति शिविर योजना और जिला उपभोक्ता सूचना केंद्र स्कीमों का मूल्यांकन हाथ में लिया है । रिपोर्ट के आधार पर इन स्कीमों को अब समाप्त करने का निर्णय लिया गया है । अतः ये स्कीमें इस समय प्रचालन में नहीं हैं ।

प्रयोजन

वित्तीय सहायता मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए दी जाएगी:-

उपभोक्ता साक्षरता के प्रसार हेतु साहित्य और दृश्य श्रव्य सामग्री तैयार एवं वितरित करना और उपभोक्ता शिक्षा हेतु जानकारी बढ़ाने हेतु कार्यक्रम ;

राष्ट्रीय/क्षेत्रीय आधार पर उपभोक्ता शिक्षा तथा अन्य सम्बन्धित मामलों में प्रशिक्षण तथा अनुसंधान के लिए सुविधाएं स्थापित करना ;

समुदाय आधारित ग्रामीण जागरूकता सम्बन्धी परियोजनाएं ;

शिकायतों पर कार्यवाही / परामर्शदायी / दिशा निर्देश तंत्रों, जैसे उपभोक्ता दिशा-निर्देश ब्यूरो की स्थापना करना ;

उपभोक्ता उत्पाद परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करना ;

जिला / तालुक स्तरों पर उपभोक्ता शिक्षण गतिविधियों की स्थाई आधार पर चलाने हेतु आधारभूत सुविधाएं सृजित करना ;

उपभोक्ता कल्याण कोष नियमावली के नियम ८ में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए और

जो परियोजनाएं उपर्युक्त के अन्तर्गत नहीं आती हैं लेकिन स्थायी समिति की राय में, जो अत्यावश्यक सामाजिक समस्याओं को सुलझा सकती हैं और उपभोक्ता कल्याण का संवर्धन कर सकती हैं ।

घटक

निम्नलिखित मदों के लिए सहायता दी जा सकती है :-

स्टाफ क्वार्टरों को छोडकर, इमारतें बनाने के लिए ।

उपस्कर खरीदने के लिए ।

फर्नीचर खरीदने के लिए ।

सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रभार ।

स्थायी समिति द्वारा कार्यक्रम/परियोजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए आवश्यक समझे जाने वाले अन्य प्रभार ।

टिप्पणी : आवर्ती आधार पर कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने के बारे में एक सामान्य नियम के रूप में विचार नहीं किया जाएगा, लेकिन एक सीमित समय के लिए परियोजना में अविभाज्य अंग के रूप में प्रशिक्षित/व्यावसायिक कर्मचारियों की नियुक्ति पर पात्र मामलों में विचार किया जा सकता है । तथापि, ऐसा व्यय कुल परियोजना लागत के १५ प्रतिशत से अधिक नहीं हो और उस पर परियोजना के स्वरूप के आधार पर विचार किया जा सकता है ।

निबंधन और शर्तें

(i) निधि का प्रयोग किसी पार्टी या राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जाएगा ।

(ii) परियोजना की प्रगति/कार्यान्वयन से संबंधित तिमाही रिपोर्ट, संबंधित राज्य सरकार को विधिवत् सूचना देते हुए मंत्रालय को नियमित रूप से भेजी जाएंगी ।

(iii) संगठन उपभोक्ता कल्याण कोष से दी गई वित्तीय सहायता से पूर्णतः या पर्याप्त रूप में अधिगृहीत परिसम्पत्तियों का रिकार्ड रखेगा । ऐसी परिसम्पत्तियों को भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना उन प्रयोजनों के अलावा, जिनके लिए अनुदान दिया गया है, अन्य कार्यों के लिए उनका निपटाया/ऋणग्रस्त या इस्तेमाल नहीं किया जाएगा । यदि संगठन किसी समय अस्तित्व में नहीं रहता है तो ऐसी परिसम्पत्तियां भारत सरकार को लौटा दी जाएंगी ।

वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया

उपभोक्ता कल्याण कोष से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के इच्छुक आवेदक को उपभोक्ता कल्याण कोष नियमावली, १९९२ में दिए गए निर्धारित प्रपत्र (फार्म क- 1) में आवेदन करना होगा । आवेदन पत्र निम्न पते पर भेजा जाएः-

सदस्य सचिव,

समिति (उपभोक्ता कल्याण कोष)

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय

उपभोक्ता मामले विभाग

कृषि भवन, नई दिल्ली-११०००१

आवेदक को गत ३ वर्षों की प्रत्येक वर्ष की अलग-अलग वार्षिक रिपोर्ट और लेखाओं का लेखा परीक्षित विवरण, सदस्यों की सूची तथा उपभोक्ता कल्याण कोष नियमावली के तहत अपेक्षित अन्य सूचनाएं प्रस्तुत करनी चाहिए । उसे अपने आवेदन के साथ संलग्न किए गए सभी दस्तावेजों की केंद्र/राज्य सरकार के किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा अनुप्रमाणित फोटोप्रतियां भी प्रस्तुत करनी होंगी । संगठन के लेखा-परीक्षित लेखाओं के विवरण पर सनदी लेखाकार की पंजीकरण संख्या और उसके कार्यालय की मुहर/स्टाम्प अवश्य लगी होनी चाहिए ।

आवेदन-पत्र नियम के रूप में राज्य सरकारों के माध्यम से भेजने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु मंत्रालय जब भी आवश्यक हो, राज्य सरकारों से पूछताछ तथा टिप्पणी प्राप्त करने के लिए आवेदन-पत्र राज्य सरकारों को भेज सकता है ।

पात्रता

सहायता के लिए निम्नलिखित पात्र हैं -

कोई भी अभिकरण / संगठन, जो तीन वर्ष की अवधि से उपभोक्ता कल्याण की गतिविधियों में लगा हो तथा कम्पनी अधिनियम १९५६ (1956 का 1) अथवा तत्समय प्रवृत किसी भी कानून के तहत पंजीकृत हो ।

टिप्पणी : अखिल भारतीय रूप से प्रसिद्घि प्राप्त अनुभव रखने वाले संगठनों को प्राथमिकता दी जाएगी । किसी संयुक्त परियोजना के लिए यदि संगठनों का कोई समूह निधि के लिए संपर्क करता है, तो एक संगठन मूल इकाई के तौर पर कार्य कर सकता है तथा सभी भागीदारों के लिए अलग-अलग तीन वर्षो की शर्त पूरी करना आवश्यक नहीं होगा

. उपभोक्ताओं, विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों की ग्राम/मंडल/समिति स्तर की सहकारिताएं ।

. औद्योगिक विवाद अधिनियम, १९४७ (१९४७ का १४) में यथा परिभाषित कोई भी उद्योग, जो ५ वर्षो की अवधि से ऐसे लाभदायक तथा उपयोगी अनुसंधान कार्य में लगा हो, जिसने आम उपभोग की वस्तुओं का मानक चिह्न तैयार करने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो अथवा दिए जाने की संभावना हो ।

. राज्य सरकार

. केंद्रीय सरकार

उपभोक्ता विवाद में कानूनी खर्चो की प्रतिपूर्ति के प्रयोजन हेतु कोई उपभोक्ता ।

सहायता की मात्रा

किसी एक व्यक्तिगत आवेदन पर सहायता की कुल राशि ५ लाख रूपये से अधिक नहीं होगी । सहायता अनुमोदित लागत के ९० प्रतिशत तक सीमित होगी । किन्तु, आपवादिक मामलों में १०० प्रतिशत सहायता देने पर विचार किया जा सकता है । सहायता की राशि के बारे में निर्णय उपभोक्ता कल्याण कोष नियमावली के नियम ५ के तहत गठित समिति द्वारा किया जाएगा ।

ऐसे संगठनों को तरजीह दी जाएगी जो अखिल भारतीय स्वरूप के हों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे हों तथा जिनमें बडी संख्या में महिलाएं शामिल हों । 

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उपभोक्ता कल्याण निधि नियम, १९९२

सा.का.नि. ८९५ () - केंद्रीय सरकार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम, १९४४ (1944 का 1) की धारा १२ घ के साथ पठित धारा ३७ की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात -

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ :

(i) इन नियमों का संक्षिप्त नाम उपभोक्ता कल्याण निधि नियम, १९९२ है

(ii) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे

. परिभाषाएं : इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

() 'अधिनियम' से, यथा-स्थिति, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम, १९४४ (1944 का 1) या सीमा शुल्क अधिनियम, १९६२ (1962 का 52) अभिप्रेत है ;

() 'आवेदक से उपभोक्ता सहकारिताओं, विशिष्टतया महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की ग्राम मंडल/समिति स्तर की उपभोक्ता सहकारिताओं या औद्योगिक विवाद अधिनियम, १९४७ (1947 का 14) में यथा परिभाषित ऐसे उद्योग जिसकी ब्यूरो द्वारा सिफारिश की गई है कि वह पांच वर्ष की अवधि से किसी ऐसे जीवनक्षम और उपयोगी अनुसंधान क्रियाकलाप में लगा हुआ है, जिसने सामूहिक उपभोग के उत्पादों का मानक चिह्न बनाने में महत्वपूर्ण योगदान किया है या करने की संभावना है या केंद्र सरकार या राज्य सरकार सहित कम्पनी अधिनियम १९५६ (1956 का 1) के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई अभिकरण/संगठन जो, तीन वर्ष की अवधि से उपभोक्ता कल्याण क्रियाकलापों में लगा है अथवा ३केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत इन नियमों के नियम ८ के खण्ड () में यथा निर्दिष्ट विधिक खर्चों की प्रतिपूर्ति के लिए उपभोक्ता भी है ' ;

() 'आवेदन' से इन नियमों के संलग्न प्रारूप का 1 में कोई आवेदन अभिप्रेत है ;

() 'ब्यूरो ' से भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, १९८६(१९८६ का ६८) के अधीन गठित भारतीय मानक ब्यूरो अभिप्रेत है ;

(.) 'केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद' से उपभोक्ताओं के अधिकारों की प्रोन्नति और संरक्षण के लिए, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, १९८६ (1986 का 68) की धारा ४ की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद अभिप्रेत है ;

() 'समिति' से नियम ५ के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है ;

() 'उपभोक्ता' का वही अर्थ है जो उसका उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, १९८६ (1986 का 68) की धारा २ की उपधारा (1) के खण्ड () में है और उसके अंतर्गत उस माल का, जिस पर शुल्क संदत्त किया जा चुका है, उपभोक्ता है;

() 'उपभोक्ता कल्याण निधि' से केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम, १९४४ (1944 का 1) की धारा १२ ग की उप-धारा (1) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित निधि अभिप्रेत है ;

() 'शुल्क' से अधिनियम के अधीन संदत्त शुल्क अभिप्रेत है ;

@(,) 'उचित अधिकारी' से ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है जिसे अधिनियम के अधीन यह आदेश करने की शक्ति है कि सम्पूर्ण शुल्क या उसका कोई भाग प्रतिदेय है ;

() 'मानक चिह्न' का वही अर्थ है जो उसका भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, १९८६ (1986 का 68) की धारा २ के खंड (1) में है;

() 'उपभोक्ताओं का कल्याण' के अंतर्गत उपभोक्ताओं के अधिकारों की प्रोन्नति और उनका संरक्षण है ;

() उन शद्बों और पदों को, जो इन नियमों में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किन्तु उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, १९८६ (1986 का 68) में परिभाषित हैं, वही अर्थ है जो उनका उस अधिनियम में क्रमशः हैं ।

उपभोक्ता कल्याण निधि की स्थापना

केंद्रीय सरकार के पास उपभोक्ता कल्याण निधि स्थापित की जाएगी, जिसमें केंद्रीय उत्पाद-शुल्क और नमक अधिनियम, १९४४ (१९४४ का 1) की धारा १२ ग की उप-धारा (2) में विनिर्दिष्ट अन्य धन के साथ शुल्क की रकमों की पावना और विनिधानों से आय प्रत्याशित की जाएगी :

परन्तु यह कि ऐसी किसी रकम का, जिसके बारे में निधि में जमा किए जाने के पश्चात समुचित अधिकारी अपील प्राधिकारी या न्यायालय के आदेशों द्वारा किसी दावेदार को संदेय के रूप में आदेश दिया जाता है या निदेश दिया जाता है, निधि से संदाय किया जाएगा

. उपभोक्ता कल्याण निधि के लेखाओं और अभिलेखों का अनुरक्षण

उपभोक्ता कल्याण निधि के संबंध में उचित और पृथक लेखाओं को केंद्रीय सरकार द्वारा रखा जाएगा और उनकी भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षा की जाएगी

. समिति का गठन

(1) उप नियम () के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा गठित समिति इन नियमों के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए उपभोक्ताओं के कल्याण हेतु उपभोक्ता कल्याण निधि में जमा किए गए धन के उचित उपयोग के लिए सिफारिशें करेगी

() समिति, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात -

() उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव, जो समिति का अध्यक्ष होगा;

**() वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में सचिव अथवा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में उपभोक्ता विभाग में वित्तीय सलाहकार जो समिति का उपाध्यक्ष होगा ;

$() वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड का अध्यक्ष या कोई अधिकारी जिसका रैंक संयुक्त सचिव से कम न हो ;

++() वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड का सदस्य (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) ; या कोई अधिकारी जिसका रैंक संयुक्त सचिव से कम न हो ;

##(.) सचिव/संयुक्त सचिव, आर्थिक सलाहकार (निगरानी) ग्रामीण विकास विभाग ;

+=() महानिदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो ;

***() उपभोक्ता मामले विभाग में उपभोक्ता कल्याण कोष के प्रभारी अपर सचिव/संयुक्त सचिव जो समिति का सदस्य सचिव भी होगा।

परन्तु यथास्थिति अध्यक्ष या उपाध्यक्ष संबंधित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों और उपभोक्ता समन्वय परिषद के एक नामनिर्देशित को, जब कभी आवश्यक हो, अधिवेशनों में आमंत्रित कर सकेंगे ।

() समिति स्थायी समिति होगी ।

कारोबार के संचालन की प्रक्रिया

(1) समिति की जब कभी आवश्यक हो, बैठक होगी, किन्तु किन्हीं भी दो बैठकों के बीच तीन मास से अधिक का अन्तराल नहीं होगा।

(2) समिति की बैठक ऐसे समय और स्थान पर होगी जिसे अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में समिति का उपाध्यक्ष ठीक समझे ।

(3) समिति की अध्यक्षता अध्यक्ष द्वारा की जाएगी और अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष समिति की बैठक की अध्यक्षता करेगा ।

(4) समिति की प्रत्येक बैठक, प्रत्येक सदस्य को लिखित सूचना देकर, जो ऐसी सूचना के जारी किए जाने की तारीख से दस दिन से कम की नहीं होगी, बुलाई जाएगी

(5) समिति की बैठक की प्रत्येक सूचना में समिति का स्थान और दिन और समय विनिर्दिष्ट होगा और उसमें संव्यवहृत किए जाने वाले कारबार का विवरण होगा ।

(6) समिति की कोई कार्यवाही तब तक विधिमान्य नहीं होगी जब तक कि उसकी अध्यक्षता अध्यक्ष या उपाध्यक्ष द्वारा न की गई हो और कम से कम तीन ६अन्य सदस्य न उपस्थित हों ।

. समिति की शक्तियां और कृत्य

(i) समिति को :

() किसी आवेदक से उसके समक्ष या यथा स्थिति केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के सम्यक रूप से प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष ऐसी पुस्तकों, लेखाओं, दस्तावेजों लिखितों अथवा आवेदक की अभिरक्षा और नियंत्रण में वस्तुओं को, जो आवेदक के समुचित मूल्यांकन के लिए आवश्यक हो, प्रस्तुत करने की अपेक्षा करने ;

() किसी आवेदक से किन्हीं ऐसे परिसरों में, जहां से ऐसे क्रियाकलापों का, जिनके बारे में यह दावा किया गया है कि वे उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए हैं, किया जाना कथित है, यथास्थिति केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के सम्यकरूप से प्राधिकृत अधिकारी को प्रवेश करने और उसका निरीक्षण करने की अनुज्ञा दी जाने की अपेक्षा करने की ;

() आवेदक के लेखाओं का, अनुदान का उचित उपयोग किया जाना सुनिश्चित करने के लिए, लेखा परीक्षा करवाए जाने ;

() किसी आवेदक से, किसी व्यतिक्रम या उसकी ओर से तात्विक जानकारी के छिपाने की दशा में समिति के मंजूर किए गए अनुदान का एकमुश्त प्रतिदाय करने और अधिनियम के अधीन अभियोजन के अध्यधीन होने की अपेक्षा करने ;

(.) किसी आवेदक से अधिनियम के उपबंधों के अनुसार देय किसी राशि को वसूल करने;

() किसी आवेदक या किसी वर्ग के आवेदकों से अनुदान के उचित उपयोग को उपदर्शित करने वाली कालिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने;

() वास्तविक असंगतता होने या तात्विक विशिष्टियों में अशुद्घता के आधार पर उसके समक्ष रखे गए किसी आवेदन को नामंजूर करना;

() किसी आवेदक को, उसकी वित्तीय प्रास्थिति और किए जाने वाले, क्रियाकलाप के महत्व और उसकी प्रकृति की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित करने के पश्चात कि दी गई वित्तीय सहायता का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा, अनुदान के रूप में न्यूनतम वित्तीय सहायता की सिफारिश करने ;

() केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद या ब्यूरो से उपभोक्ता कल्याण निधि में से व्यय उपगत करने के प्रयोजन के लिए परियोजनाओं/प्रस्तावों पर विचार करने के लिए मोटे तौर पर मार्गदर्शक सिद्घान्त बनाने ;

() लाभप्रद और सुरक्षित सेक्टरों की, जहां उपभोक्ता कल्याण निधि में से विनिधान किया जा सकता है, परिलक्षित करने और पद्नुसार सिफारिशें करने ;

() नियम २ के खण्ड () में यथा निर्दिष्ट किसी आवेदक की उपभोक्ता कल्याण गतिविधियों में संलग्नता की अवधि के लिए अपेक्षित शर्तों को शिथिल करने ;

() उपभोक्ता कल्याण निधि के प्रबंधन और प्रशासन के लिए दिशा-निर्देश बनाने की शक्ति होगी ।

() समिति किसी आवेदन पर तब तक विचार नहीं करेगी जब तक कि उसमें तात्विक ब्यौरों की जाँच न कर ली हो और सदस्य सचिव द्वारा तदनुसार विचार करने के लिए सिफारिश न ही हो

. उपभोक्ता कल्याण निधि में उपलब्ध जमा रकम के उपयोग के लिए प्रयोजनों का विनिर्देश :

समिति निम्नलिखित के लिए सिफारिशें करेगी :

() किसी आवेदक को अनुदान उपलब्ध कराना :

() उन मानक चिह्नों से, जो केंद्रीय सरकार द्वारा उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए आवश्यक समझे जाएं, संबंधित क्रियाकलापों के लिए ब्यूरो द्वारा सिफारिश किए गए अनुदान को उपलब्ध कराना ;

() उपभोक्ता कल्याण निधि में उपलब्ध धन का विनिधान ;

() किसी उपभोक्ता विवाद में, उसके अंतिम न्याय निर्णायन के पश्चात् परिवादी या किसी वर्ग के परिवादियों द्वारा उपगत विधिक व्ययों की प्रतिपूर्ति के लिए अनुदान १०(चुनिंदा आधार पर) उपलब्ध कराना;

(.) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद द्वारा सिफारिश किए गए किसी अन्य प्रयोजन के लिए ११(जिसे समिति द्वारा समुचित समझा जाए) अनुदान उपलब्ध कराना ।

उपभोक्ता कल्याण निधि के तहत आवेदनों के निपटान की समय-सारणी

उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता कल्याण निधि के तहत आवेदनों के निपटान केलिए एक समय सारणी तैयार की है ।

इस संबंध में समय की शुरुआत राज्य सरकारों से आवेदन/सिफारिशें प्राप्त होने की तारीख से होगी । इसके पश्चात आवेदन के निपटान की समय सारणी इस प्रकार होगी :

(i) आवेदन की पावती : राज्य सरकार से आवेदन प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर पावती भेज दी जाएगी ।

(ii)स्थायी समिति द्वारा विचार ; राज्य सरकार से प्राप्त आवेदन को उसके प्राप्त होने के एक महीने के भीतर स्थायी समिति अथवा समिति की अगली बैठक जो भी बाद में हो समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाएगा ।

(iii) वित्त प्रभाग का अनुमोदन : इसमें बैठक का कार्यवृत्त तैयार करना और मंत्रालय के एकीकृत वित्त प्रभाग द्वारा अनुमोदन शामिल है । इस प्रयोजन के लिए कुल १० दिन का समय लिया जाएगा ।

(iv) मंजूरी जारी करना : वित्त प्रभाग से अनुमोदन प्राप्त होने के बाद ५ दिन के भीतर मंजूरी जारी कर दी जाएगी ।

(v) अनुदान जारी करना : मंजूरी जारी होने के बाद आवेदक से बंध पत्र तथा अन्य कागजात प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा । यदि कागजात पूरे हैं तथा सही हैं तो ३० दिन के भीतर चैक जारी कर दिया जाएगा । दूसरे शद्बों में आवेदक से पूर्ण तथा सही सूचना मिलने की तारीख से ३० दिन के भीतर चैक जारी कर दिया जाएगा ।

(vi) प्रगति रिपोर्टें आदि भेजने के लिए स्मरण पत्र भेजना : अनुदान जारी करने के बाद आवेदक को कृत कार्यों के बारे में छमाही रिपोर्ट भेजने के लिए कहा जाएगा । अनुदान जारी करने के छः महीने बाद अनुदानग्राही को स्मरण-पत्र जारी किया जाएगा ।

(vii) लेखाओं का हिसाब किताब करना : आवेदक को १८ महीने बाद मंजूर अनुदान के व्यय का लेखा परीक्षित विवरण भेजने के लिए स्मरण कराया जाएगा, जैसा कि निबंधन और शर्तों में उल्लेख किया गया है । यदि भेजे गए कागजात पूर्ण तथा सही हैं तो लेखाओं का ऐसे कागजात की प्राप्ति के २ महीने के भीतर हिसाब किताब कर दिया जाएगा ।

 

प्ररूप --

(उपभोक्ता कल्याण निधि नियम, १९९२ का नियम २ ( देखिए)

महत्वपूर्ण : कृपया सही ब्यौरे देते हुए, जिन्हें मांगा गया है, जो सत्यापनीय कार्यकलापों को सही स्थिति पर आधारित हो किसी तात्विक जानकारी को छिपाए बिना, जिसे करने से अधिनियम, के अधीन अभियोजन बनाया जा सकेगा, इस प्रारूप को भरें

टिप्पणी : सभी आवेदन अनुलग्नकों सहित अनिवार्यतः दो प्रतियों में प्रस्तुत किए जाने चाहिए और प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेज केंद्र या राज्य सरकार के किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा अनुप्रमाणित होने चाहिए ।

 

आवेदक का नाम और डाक का पूरा पता

 

 

नियम २ के खण्ड ( ) के अधीन आवेदक की प्रस्थिति

 

 

स्थापना की तारीख

 

 

क्या सोसायटी, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, १८६० (1860 का २१) या किसी अन्य सुसंगत अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत है

 

 

यदि हाँ तो रजिस्ट्रीकरण संख्या और वर्ष (रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र की अनुप्रमाणित प्रति संलग्न कीजिए)

 

 

क्या संगठन राष्ट्रीय/राज्य स्तर का है?

 

 

प्रबंध समिति के सदस्यों की संख्या तथा पदाधिकारियों के नाम, पते और उपजीविका की सूची ।

 

 

संगठन, उसके उद्देश्यों तथा पिछले तीन वर्षों के दौरान उसके क्रियाकलापों का संक्षिप्त ब्यौरा

 

 

प्रयोजन, जिसके लिए रकम अपेक्षित है (कृपया परियोजना के ब्यौरे और उसका प्रस्तावित कार्यान्वयन कथित करें)

 

 

अपेक्षित अनुदान की रकम-अनावर्ती/आवर्ती के अधीन मदवार ब्यौरे संलग्न कीजिए ।

 

 

किए गए क्रियाकलापों की समय अनुसूची ।

 

 

आवेदक द्वारा उपगत/विनिहित या आवेदक द्वारा उपमत की जाने वाली कुल रकम ।

 

 

अतिशेष रकम के निधिकरण के स्रोत क्या संगठन किसी अन्य शासकीय/गैर शासकीय स्रोत से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहा है, यदि हां तो ब्यौरा दीजिए ।

 

 

पिछले पांच वर्षों के दौरान आवेदक के विरुद्घ किसी न्यायालय में प्रारंभ किए गए किसी अभियोजन के ब्यौरे यदि कोई हों, का ब्यौरा ।

 

 

निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां (केंद्र या राज्य सरकार के किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा विधिवत अनुप्रमाणित) संलग्न की जानी है:

 

 

(1) संस्था का गठन और संस्था के अन्तर्नियम।

 

 

() संगठन की गत तीन वर्षों की वार्षिक रिपोर्टें (कृपया प्रत्येक वर्ष की अलग-अलग वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करें)

 

 

() गत ३ वर्षों के दौरान प्रत्येक वर्ष के लेखाओं का वार्षिक लेखा परीक्षित विवरण जिसे सनदी लेखाकार द्वारा बाकायदा हस्ताक्षर किए गए हों । इन विवरणों पर सनदी लेखाकार की पंजीकरण संख्या और उसके कार्यालय की मोहर या स्टाम्प अवश्य लगी होनी चाहिए ।

 

 

इस विभाग से पूर्व में प्राप्त हुई अनुदान राशि का ब्यौरा, यदि कोई हो ।

 

                                                            घोषणा

( आवेदक या उसके प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा हस्ताक्षर की जाए)

 

9 इनमें इसके पूर्व दी गई विशिष्टियां सत्य और सही हैं । कुछ भी तात्विक छिपाया नहीं गया है । यह प्रमाणित किया जाता है कि मैंने/हमने उन मार्गदर्शनों, निबंधनों और शर्तों को पढ़ लिया है जो स्कीम को अधि- शासित करते हैं और मैं/हम अपने संगठन/संस्था की ओर से उनका पालन करने का वचन देता हूं/देते हैं । वित्तीय सहायता यदि प्रदान की गई हो तो, उपभोक्ताओं के अधिकारों या मानक चिह्नों को प्रोन्नति और संरक्षण के घोषित उपयोग के लिए प्रयोग की जाएगी । ( जो लागू न हो उसे काट दीजिए)

 

आवेदक

तारीख - - - - - - -

स्टेशन - - - - - -- - -

 

 

सेवा में

सदस्य सचिव,

समिति ( उपभोक्ता कल्याण कोष) ,

कृषि भवन, नई दिल्ली ।

नोट -

कृपया उपभोक्ता कल्याण कोष से वित्तीय सहायता के लिए प्ररूप क- में आवेदन के साथ नीचे निर्धारित किया गया शपथ-पत्र भी लगाएं ।

 

 

शपथ-पत्र

मैं --------------------------------- सुपुत्र/सुपुत्री/पत्नी/श्री ------------------------------निवासी ------------------------------------------- और वर्तमान में मैसर्स ---------------के अध्यक्ष/सचिव के रूप में कार्यरत एतद्द्वारा शपथपूर्वक घोषणा करता हूं कि मैसर्स (संगठन का नाम और पूरा पता) ने पिछले तीन वर्षों में मंत्रालयों/विभागों/संगठनों से निम्नलिखित सहायता अनुदान प्राप्त किए हैं :-

वर्ष

धन देने वाले मंत्रालय/संगठन का नाम

प्राप्त अनुदान की राशि

अनुदान का उद्देश्य

स्वीकृति पत्र की संख्या और तारीख

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अभिसाक्षी

सत्यापन

यह सत्यापित किया जाता है कि मेरी सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास में उक्त सूचना पूर्ण और सत्य है तथा उसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है । मैं यह भी स्वीकार करता हूं कि यदि एतद्द्वारा दी गई सूचना अपूर्ण अथवा असत्य पाई जाती है तो उपभोक्ता कल्याण कोष से अनुदान को रद्द कर दिया जाए ।

वर्ष २०० में आज --------------- माह के -------दिन सत्यापित

गवाह

अभिसाक्षी

1.

.

उपभोक्ता कल्याण कोष

उपभोक्ता कल्याण निधि के तहत आवेदनों के निपटान की समय-सारणी ।

पृष्ठभूमि

प्रयोजन

उपभोक्ता कल्याण निधि नियम १९९२

निबंधन और शर्तें

घटक

सहायता की मात्रा

उद्देश्य

विशेष परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता

वित्तीय सहायता के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया

पात्रता

प्ररूप क-

उपभोक्ता जागरूकता के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना

शिकायत के लिए मंच

नियम और दिशा-निर्देश

राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष के मॉडल दिशा-निर्देश

उन संगठनों की सूची जिन्होंने उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं भेजे हैं ।

                                        --- : ----

 

 
राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष नियम
प्रमुख उपभोक्ता संगठन