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केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम और राज्य एजेंसियों के जरिए धान, मोटे अनाजों और गेहूं को मूल्य समर्थन प्रदान करती है। निर्दिष्ट केंद्रों पर बिक्री के लिए पेश की गई विहित विनिर्दिष्टियों के अनुरूप समस्त खाद्यान्न सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लिए जाते हैं। उत्पादकों के पास यह विकल्प होता है कि वे अपना उत्पाद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारतीय खाद्य निगम/राज्य एजेंसियों को अथवा खुले बाजार में जहां भी उन्हें लाभकारी हो, बेचें। राज्य सरकारों और उनकी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए खाद्यान्नों की सुपुर्दगी अन्तत: भारतीय खाद्य निगम द्वारा ले ली जाती है ताकि सम्पूर्ण देश में इनका वितरण किया जा सके।
2. सरकारी एजेंसियों द्वारा खाद्यान्नों की खरीद करने के उद्देश्य-
· यह सुनिश्चित करना कि किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिले और उन्हें मजबूरन बिक्री न करनी पड़े।
· सरकार की लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याण योजनाओं की जरूरत पूरी करना ताकि राजसहायता प्राप्त खाद्यान्नों की आपूर्ति गरीबों और जरूरतमंदों को की जा सके।
· खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्यान्न का बफर स्टाक बनाना।
3. लेवी प्रणाली के अधीन चावल की खरीद
सरकार द्वारा चावल मिल-मालिकों और चावल व्यापारियों पर सांविधिक लेवी लगाकर भी चावल की खरीदारी की जाती है। लेवी चावल की प्रतिशतता केंद्रीय पूल के लिए आवश्यकता, घरेलू खपत और विपणनीय अधिशेष को हिसाब में लेकर केंद्र सरकार के अनुमोदन से राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित की जाती है। प्रत्येक खरीफ विपणन मौसम की शुरूआत से पहले भारत सरकार द्वारा लेवी चावल के मूल्य निर्धारित किए जाते हैं। |